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एनजीएमए मुंबई  |  एनजीएमए बंगलुरू

Tuesday, October 21, 2014


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शोकेस
देश में आधुनिक कला के प्रोत्साहन के उद्देश्य से एनजीएमए की स्थापना की गई। इसका लक्ष्य 1857 से अद्यतन उपलब्ध कलाकृतियों को हासिल करके और उनका संरक्षण करना है। एनजीएमए का कला संग्रह व्यापक एवं विविधतापूर्ण है। यदि यहां मौजूद 17,000 कलाकृतियाँ संस्थान के संपन्न एवं भव्य अतीत के साक्ष्य है तो वर्तमान के प्रति श्रद्धांजलि भी है। इस कला दीर्घा में मिनियेचर पेंटिंग्स से लेकर मॉडर्निस्ट इंटरवेंशन और ऑ करेट समकालीन अभिव्यक्ति देखते ही बनती है।

एनजीएमए का जोर सदैव चित्रकलाओं, मूर्तिकलाओं, ग्राफिक्स और तब कलात्मक फोटाग्रफ्स को हासिल करने पर  रहा है। गुणात्मक रूप से उत्कृष्ट संग्रह को एक फलक प्रदान करना इसका महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इस बात का हमेशा ध्यान रखा गया है कि एनजीएमए उन कलाकृतियों का संग्रहालय बने जिन्होंने चित्र की भाषा में निरंतर बदलाव की पगडंडी पर नजर रखी है।

आधुनिक एवं समकालीन संग्रह के विकास में हर संभव सावधानी बरती गई है। एनजीएमए में न केवल बीते युग के दिग्गजों जैसे राजा रवि वर्मा और अबनीन्द्रनाथ टैगोर के साथ-साथ अमृता शेर-गिल और रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे आधुनिक कलावादियों की कृतियों को हासिल करने पर जोर दिया गया बल्कि समकालीन कला को भी पूरी अहमियत दी गई। और इसका सबूत है एम.एफ. हुसैन की 1955 की कृति 'जमीन' जिसे एनजीएमए ने खरीदा। इस कृति में हुसैन ने आइकंस एवं प्रतीकों का जो उपयोग किया वह हर लिहाज से ऐतिहासिक कहा जा सकता है। इसी प्रकार हुसैन की 'फार्मर्स फैमिली' को एनजीएमए में शुमार कर संग्रह की गरिमा को बढ़ाया गया। इस कृति में आम आदमी को आत्म सम्मान और आइकनिक चरित्र प्रदान किया गया था।

एनजीएमए को तोशाख़ाने से भी लघु कलाओं की कुछ कृतियां योगदान स्वरूप निःशुल्क प्राप्त हुई। 1857 के बाद की ये कृतियाँ 1911 में दिल्ली दरबार समारोह और अन्य वाइस-रीगल दरबारों के मद्देनजर तैयार की गई थी जैसे विशिष्ट कुर्सियाँ, चाँदी की परात, कशीदाकारी से सम्पन्न मलमल के पर्दे, चाँदी के बने अन्य आकर्षक सामान।

एनजीएमए मुख्यतः तीन प्रकार से कृतियों के संग्रह में संलग्न रहा है - खरीद, स्थायी रूप से उधार और उपहार। सबसे सहृदय और उतने ही अनमोल उपहारों में अमृता शेर-गिल की चित्रात्मक कृतियों का उल्लेख किया जा सकता है जो आज भी मुखर और जीवंत है। अमृता के पिता उमराव सिंह और उसके बहनोई केसीके सुंदरम् ने श्रद्धा और सहृदयता से ये उपहार प्रदान किए। शेर-गिल के पति डॉ. विक्टर एगन के हाथों अमृता की कुल 44 चित्रकलाएं बिकीं जिन्हें एनजीएमए ने खरीद लिया। इस प्रकार कुल मिलाकर अमृता शेर-गिल का संग्रह एनजीएमए की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 1949 से 1950 के दौरान ये कृतियां एनजीएमए को हासिल हुईं।

कुछ वर्षों पहले रसजा फाउण्डेशन के न्यासियों ने 1273 कृतियों का संग्रह सदा-सदा के लिए एनजीएमए को उधारस्वरूप सौंप दिया जो गैलरी के लिए महत्वपूर्ण योगदान साबित हुआ। इस संग्रह को समेकित रूप से प्रस्तुत करने का श्रेय भूतपूर्व कलाकार और कला इतिहासकार जया अप्पासामीं को जाता है। संग्रह में बड़ी संख्या में वैसी कृतियां हैं जिन्हें देशी (स्थानीय) कलाकारों ने 19वीं सदी एवं 20 वीं सदी के पूर्वार्द्ध में साकार किया। इस प्रकार गैलरी के पास उपलब्ध आधुनिक भारतीय कला के आरंभिक काल के संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये उस कालखंड की कलाएं हैं जब ब्रिटेन और भारत के बीच परस्पर संपर्क में उत्तरोत्तर वृद्धि से कला की पारंपरिक शैलियों में तेज गति से परिवर्तन देखा गया।

एनजीएमए के पास यूरोप एवं सुदूर पूर्व देश के कई कलाकारों की कृतियां भी उपलब्ध है जो या तो खरीदी गई हैं या उपहारस्वरूप मिली हैं। इनमें से ऐसे कलाकारों की कृतियां भी हैं जिनका 18वीं एवं 19वीं सदी के दौरान भारत आगमन हुआ था। इनकी कृतियों में पोर्ट्रेट एवं अदभुत भारतीय दृश्य शामिल हैं। टिली केटल, विलयम होजेज, टॉमस डैनियल, एमिली एडन आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
 

लघुचित्र

तंजाउर एवं मैसूर

यूरोपियन पर्यटक कलाकार

कम्पनी काल

कालीघाट पेंटिंग

सैद्धान्तिक यथार्थवाद

बंगाल स्कूल

अमृता शेर-गिल

यामिनी राय

गगनेंद्रनाथ टैगोर

रवीन्द्रनाथ टैगोर

शांतिनिकेतन

सामूहिक कलाकार

भावप्रधान कला

1960 का कला आंदोलन

1970 का कला आंदोलन

समकालीन

आधुनिक मूर्तिकला

मुद्रण करना

फोटोग्राफी